सहारनपुर : खनन विभाग की कार्रवाई के विरोध में सहारनपुर के क्रशर संचालकों और खनन कारोबारियों ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। क्रशर्स यूनियन ने विभाग पर क्रशर मालिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा है कि जब तक उनकी शिकायतों और मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक जिले के सभी क्रशर बंद रखे जाएंगे। कारोबारियों ने 15 सितंबर की मध्यरात्रि 12 बजे के बाद खनन सामग्री से लदी कोई भी गाड़ी नहीं भरने का फैसला लिया है। इसके साथ ही 18 सितंबर से जिला मुख्यालय पर लगातार धरना देने की घोषणा की गई है।
क्रशर संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से खनन विभाग की ओर से की जा रही पैमाइश, भंडारण अनुज्ञप्ति और ड्रोन सर्वे के आधार पर कार्रवाई को लेकर कारोबारियों में नाराजगी है। यूनियन का दावा है कि कई मामलों में कारोबारियों की ओर से अपना तथ्यात्मक पक्ष विभाग के सामने रखा गया, लेकिन उसका उचित निस्तारण किए बिना ही क्रशरों का संचालन रोकने जैसी कार्रवाई की गई।
तीन महीने में हुई पैमाइश पर उठाए सवाल
क्रशर कारोबारियों के मुताबिक पिछले तीन महीनों में खनन विभाग की ओर से क्रशरों की पैमाइश की गई। यूनियन का आरोप है कि इस दौरान न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। पैमाइश के बाद क्रशर मालिकों ने अपना पक्ष रखते हुए विभाग को जवाब दिया और दोबारा जांच कराने के लिए आवेदन भी किया।
कारोबारियों का आरोप है कि उनके जवाब और पुनः जांच के आवेदन का निस्तारण किए बिना ही क्रशरों के ओटीपी बंद कर दिए गए, जिससे उनका संचालन प्रभावित हुआ। यूनियन का कहना है कि पहले कारोबारियों की आपत्तियों और दस्तावेजों का नियमानुसार निस्तारण होना चाहिए और उसके बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुराने भंडारण को लेकर भी विवाद
क्रशर संचालकों की दूसरी बड़ी आपत्ति भंडारण नियमावली 2018 के तहत भंडारण अनुज्ञप्ति के नवीनीकरण को लेकर है। यूनियन का कहना है कि ऐसे कई क्रशर हैं, जिनकी पांच साल की भंडारण अनुज्ञप्ति समाप्त हो चुकी है। अब इनके भंडारण का नवीनीकरण इस आधार पर नहीं किया जा रहा कि भंडारण स्थल पर मौजूद अवशेष खनन सामग्री की मात्रा को मान्य नहीं माना जाएगा।
कारोबारियों का कहना है कि यह सामग्री उस समय खरीदी गई थी, जब क्रशर के पास वैध अनुज्ञप्ति थी। ऐसे में बाद में उसे अवैध मानकर जब्त करना और उसकी नीलामी करना उचित नहीं है। यूनियन ने इस मामले में स्पष्ट नीति और नियमों के तहत समाधान की मांग की है।
सिल्ट और जमीन के नीचे दबी आरबीएम की पैमाइश पर भी नाराजगी
पैमाइश के दौरान सिल्ट, भंडारण स्थल के नीचे दबी आरबीएम और पहले से जुर्माना लगाकर निस्तारित की जा चुकी मात्रा को लेकर भी क्रशर संचालकों ने सवाल उठाए हैं।
यूनियन का कहना है कि यदि किसी मात्रा को पहले अवैध मानकर उस पर जुर्माना लगाया गया और जुर्माना वसूल भी लिया गया, तो उसे दोबारा नई पैमाइश में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। कारोबारियों की मांग है कि ऐसी मात्रा को नई पैमाइश से अलग रखा जाए या उसके सापेक्ष क्रशर को फॉर्म-सी उपलब्ध कराया जाए।
ड्रोन सर्वे को लेकर सबसे ज्यादा विवाद
सहारनपुर क्रशर्स जोन में वर्ष 2025 में ड्रोन से सर्वे किया गया था। यूनियन के मुताबिक उस समय इसे पायलट प्रोजेक्ट बताया गया था। कारोबारियों का आरोप है कि करीब चार महीने बाद इसी ड्रोन सर्वे को आधार बनाकर क्रशरों पर जुर्माने लगाए गए। कुछ क्रशर संचालकों ने इन कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय की शरण ली। यूनियन का दावा है कि न्यायालय ने कुछ मामलों में लगाए गए जुर्माने को निरस्त कर दिया।
इसके बावजूद विभाग की ओर से इन आदेशों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। कारोबारियों ने इसे न्यायालय के आदेशों की अवहेलना बताया है।हालांकि इन आरोपों पर खनन विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे विवाद में विभाग की कार्रवाई, न्यायालय के आदेशों और उनके अनुपालन की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
रैंप के पट्टों का बहिष्कार करेंगे क्रशर कारोबारी
क्रशर्स यूनियन ने केवल क्रशर बंद करने तक आंदोलन सीमित नहीं रखा है। यूनियन ने विभाग की ओर से किए जा रहे रैंप के पट्टे नहीं लेने का भी निर्णय लिया है। कारोबारियों का कहना है कि यदि कोई दूसरा व्यापारी रैंप का पट्टा लेता है तो क्रशर संचालक उससे आरबीएम नहीं खरीदेंगे।
इसके अलावा अगले माह अनुबंधित होने वाले 14 सरकारी पट्टों का अनुबंध नहीं करने और उनका संचालन नहीं करने का भी ऐलान किया गया है। एक अक्टूबर से संचालित होने वाले वर्तमान पट्टों को लेकर भी यूनियन ने कहा है कि उन्हें संचालित नहीं किया जाएगा और न ही कोई क्रशर उनसे आरबीएम खरीदेगा।
18 सितंबर से जिला मुख्यालय पर धरना
क्रशर संचालकों ने 18 सितंबर से जिला मुख्यालय पर लगातार धरना देने की घोषणा की है। यूनियन का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कारोबारियों की सभी प्रमुख समस्याओं का व्यापारी हित में समाधान नहीं किया जाता।
सबसे बड़ा ऐलान सरकार को मिलने वाले राजस्व को लेकर किया गया है। यूनियन ने कहा है कि कार्यबंदी के दौरान जीएसटी, बिजली बिल और अन्य टैक्स समेत सरकार को दिए जाने वाले विभिन्न राजस्व का भुगतान भी रोक दिया जाएगा।
क्रशर कारोबारियों की सामूहिक कार्यबंदी का असर जिले में खनन सामग्री की सप्लाई पर पड़ सकता है। आरबीएम और अन्य खनन सामग्री का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में यदि आंदोलन लंबा चलता है तो निर्माण कारोबार और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।
फिलहाल क्रशर्स यूनियन अपने फैसले पर कायम है। कारोबारियों का कहना है कि उनका आंदोलन विभागीय कार्रवाई के खिलाफ है और जब तक पैमाइश, भंडारण, ड्रोन सर्वे तथा अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतों का समाधान नहीं होता, तब तक कार्यबंदी जारी रहेगी। अब प्रशासन और खनन विभाग के सामने चुनौती है कि कारोबारियों के इस आंदोलन को समाप्त कराने के लिए क्या रास्ता निकाला जाता है।

